Wednesday, May 14, 2014

अमेठी में बड़ी जीत को तरसेंगे राहुल गांधी, संभालेंगे विपक्ष के नेता की कुर्सी?

 चुनाव के बाद हुए एग्जिट पोल के मुताबिक, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में एनडीए की सरकार तय मानी जा रही है। वहीं सत्ता से बेदखल होती दिख रही कांग्रेस ने अपने उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए अगली भूमिका तकरीबन तय कर ली है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने राहुल को लोकसभा में विपक्ष का नेता बनाना लगभग तय कर लिया है। बता दें कि राहुल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह तीसरे मोर्चे को समर्थन देने के बजाय विपक्ष में बैठना ज्यादा पसंद करेंगे। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो इसी बयान के साथ राहुल को विपक्ष का नेता बनाने की पृष्ठभूमि तैयार कर ली गई थी।

दूसरी तरफ, राहुल गांधी की इस बार अमेठी से जीत कमजोर पड़ सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल की तीसरी बार जीत तो तय है, लेकिन वोट मार्जिन काफी कम हो सकता है। उधर, कांग्रेस नेताओं ने राहुल को हार की जिम्मेदारी से बचाने के लिए बयानबाजी तेज कर दी है। उनका कहना है कि जो भी जनमत आएगा वो सरकार के कामकाज पर निर्भर होगा, न कि पार्टी के प्रदर्शन पर।

जेटली, सिब्बल और माकन समेत कई दिग्‍गज हार सकते हैं चुनाव

लोकसभा चुनाव खत्‍म होने के बाद हर किसी की नजर 16 मई यानी नतीजे आने के दिन पर है। जनता जहांयह जानने को उत्‍सुक है कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी, वहीं लोगबाग यह भी देखना चाहेंगे कि इस चुनाव में कौन-कौन से दिग्‍गज नेता अपनी सीट बचा पाते हैं और कौन नहीं। इस बात की एक झलक एबीपी-नीलसन के एग्जिट पोल में दिखाई देती है। इस पोल के मुताबिक, इस बार कांग्रेस के कई बड़े नेता चुनाव हार जाएंगे। इनमें कपिल सिब्‍बल, अजय माकन और श्रीप्रकाश जायसवाल जैसे बड़े नाम हैं। दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी के बड़े नेता भी जीतते हुए नहीं दिख रहे हैं। चाहें वाराणसी सीट से अरविंद केजरीवाल हों या फिर अमेठी से कुमार विश्‍वास। उत्‍तर प्रदेश, बिहार, मध्‍य प्रदेश जैसे राज्‍यों की हॉट सीटों के बारे में क्‍या कहता है एबीपी-नीलसन का यह एग्जिट पोल, जानते हैं: 

उत्‍तर प्रदेश की अन्‍य प्रमुख सीटों में बागपत से राष्ट्रीय लोक दल के अजित सिंह हारते हुए बताए जा रहे हैं। उधर, मथुरा सीट से अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी भी हारते हुए दिख रहे हैं। इस सीट से बीजेपी की हेमा मालिनी लोकसभा में जा सकती हैं। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की आजमगढ़ सीट से जीत भी निश्चित नहीं है।

मोदी को PM नहीं बनने देना है इन 10 नेताओं का मकसद,

लोकसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं और अब बस नतीजों का इंतजार है। तमाम एग्जिट पोल की मानें तो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत आसानी से हासिल कर लेगा। हालांकि, मोदी की राह इतनी आसान नहीं, जितनी दिख रही है। भारतीय राजनीति में ऐसे कई धुरंधर हैं, जो मोदी का रास्‍ता रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे।

कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी की कमान पूरी तरह अपने हाथ में रखी। इन चुनावों में लड़ाई भी स्पष्ट तौर पर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही थी, तो निश्चित तौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी कतई नहीं चाहेंगे कि भाजपा या मोदी सरकार बनाने में कामयाब हो जाएं। राहुल गांधी ने तीसरे मोर्चे की सरकार बनने की संभावना पर समर्थन न देने की बात भले ही कही है, लेकिन अतीत में यह पार्टी ऐसा करती आई है। इसके अलावा, पूरे चुनावी कैंपेन में बीजेपी के पीएम पद के प्रत्‍याशी नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी को खास तौर पर निशाना बनाया। ऐसा करके मोदी ने खुद राहुल को अपना सीधा प्रतिद्वंद्वी बना लिया है। ऐसे में राहुल मोदी को रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे, यह मानने में कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
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Monday, May 12, 2014

विनीत महाजन मामला: हमले की निष्पक्ष जांच को हाईकोर्ट में याचिका दायर

एडवोकेट विनीत महाजन पर शनिवार को हुए जानलेवा हमले के विरोध में बार एसोसिएशन ऑफ अमृतसर ने सोमवार को हड़ताल कर काम ठप रखा। वहीं, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर वकीलों की सुरक्षा की मांग की। याचिका में जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें कहा गया कि गोरसी के खिलाफ अमृतसर के व्यापारी राकेश भारद्वाज पर हमले की जांच के मामले में दर्ज एफआईआर की जांच निष्पक्ष एजेंसी के निर्देश दिए जाएं। 

विनीत महाजन और संदीप गोरसी की ओर से जोशी के खिलाफ दो केस और होटल की इमारत तोडऩे के तहत अलग से केस दर्ज करवाया गया था। इस पर जोशी के खिलाफ वारंट जारी किए हैं। इसमें अग्रिम जमानत के लिए जोशी ने सेशन कोर्ट में एप्लीकेशन दायर की थी, लेकिन हड़ताल के चलते अदालत की ओर से मामले पर सुनवाई के लिए 13 मई की तारीख तय की गई है।

लंबित आईपीएस पोन्नूचामी जेल को मिली जमानत

दारा एनकाउंटर केस में गिरफ्तार आईपीएस अफसर व तत्कालीन आईजी ए. पोन्नूचामी जयपुर सेंट्रल जेल से एक माह की जमानत पर बाहर आ गए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पोन्नूचामी सोमवार दोपहर 12:30 बजे जेल से बाहर आए।
जेल से बाहर आते ही पोन्नूचामी ने मुख्य द्वार के ऊपर लगी गणेश प्रतिमा को नमन किया।
सीबीआई ने दारा सिंह एनकाउंटर केस में ए पोन्नूचामी को मई 2011 में गिरफ्तार किया था। पोन्नूचामी तब से जेल में ही थे। पोन्नूचामी के खिलाफ कोर्ट ने 25 अगस्त 2011 को आरोप तय किए थे।

शुक्रवार को हाईकोर्ट के न्यायाधीश महेश चन्द्र शर्मा ने पोन्नूचामी को दो लाख रुपए के व्यक्तिगत मुचलके और दो-दो लाख रुपए की दो जमानतों पर अंतरिम जमानत दी थी। अंतरिम जमानत अर्जी में पोन्नूचामी ने कहा कि उनकी मां संगु मुत्थामल कैंसर से पीडि़त हैं और चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी रेडियो थेरेपी चल रही है और मुझसे मिलना चाहती हैं। पोन्नूचामी की ओर से उनकी मां के इलाज से संबंधित दस्तावेज पेश किए गए।

नेताओं के बीच संजीव सक्सेना ने किया सरेंडर, 17 तक रिमांड पर

 संजीव सक्सेना को अदालत में सरेंडर कराने के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता भी कोर्ट में पहुंचे थे। संजीव सक्सेना 12.35 बजे कोर्ट पहुंचे थे लेकिन कांग्रेस जिला अध्यक्ष पीसी शर्मा, निगम परिषद अध्यक्ष कैलाश मिश्रा और पूर्व महापौर विभा पटेल आधा घंटा पहले से सक्सेना के समर्थन में पहुंच गए थे। 
 
सक्सेना को जब कोर्ट रूम में लाया गया तो ये नेता भी सीजेएम कोर्ट के अंदर बेंच पर जाकर बैठ गए। सक्सेना के पीछे उनके समर्थक भी अदालत के अंदर पहुंच गए थे। सीजेएम पंकज सिंह माहेश्वरी ने जब इन लोगों की मौजूदगी पर आपत्ति की तो सभी को कोर्ट रूम से बाहर जाने को कह दिया गया।  

सीजेएम ने संजीव की ओर देखते हुए आदेश दिया, कटघरे में खड़े हो जाओ। इसके बाद वह कटघरे के अंदर चला गया। संजीव के वहां पहुंचने से  पहले ही उनकी पत्नी और भाई सीजेएम कोर्ट की बेंच पर जाकर बैठ गए थे। जब सीजेएम ने पूछा कि आप लोग कैसे बैठे हैं तो महिला ने बताया कि वह संजीव की पत्नी है और साथ बैठे युवक ने खुद का परिचय संजीव के भाई प्रवीण के रूप में दिया। 

Sunday, May 11, 2014

मोदी के PM बनने के बारे में क्‍या सोचते हैं दुनिया के 5 देश

 भारत में 16 मई को होने वाली मतगणना के बाद बनने वाली नई सरकार को लेकर देश ही नहीं, बल्कि विदेश में भी काफी उत्‍सुकता है। नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी की सरकार बनने की संभावनाओं के कारण भी दूसरे देशों की दिलचस्पी हमारे चुनाव में बढ़ गई है।मोदी के पीएम बनने की संभावनाओं के बीच दुनिया के बड़े देशों की उनके बारे में राय बेहद अहम हो जाती है। 
2002 में हुए गुजरात दंगों के बाद अमेरिका ने 2005 में मोदी को यूएस वीजा देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, 9 साल बाद 2014 में अमेरिकी राजदूत नैंसी पावेल की मोदी से मुलाकात को अमेरिकी नीति में उनको लेकर हुए बदलाव के तौर पर देखा गया। अमेरिका यह साफ कर चुका है कि वह भारत में चुनी गई किसी भी नई सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। जानकार मानते हैं कि अमेरिका द्वारा मोदी से बैन हटाया जाना उसकी रणनीति का अगला कदम होगा। मोदी भी पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह विदेशी मामलों में वाजपेयी के रास्‍तों पर चलेंगे, जो अमेरिका पर भी लागू होता है। असल दिक्‍कत है, अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा की दुनिया के किसी भी हिस्‍से में नई भागेदारी बढ़ाने को लेकर उदासीनता। देश के आर्थिक उदारीकरण के मद्देनजर अमेरिका को बेहतर रिश्‍तों के लिए प्राेत्‍साहित करना मोदी के  पीएम बनने की दशा में उनके सामने बड़ी चुनौती होगी।